Friday, 16 October 2015

Gazal

ल ! दूर से देखा तो बडे ही सुहाने मन्जर थे ! पास पहुचे तो सारे खेत ब॑जर थे !! हम उनके पास से भी प्यासे लॊटे ! जिनकी आ॑खो मे, प्यार के समन्दर थे !! मासूम चेहरो मे जब भी झा॑क कर देखा ! कितने ही शैतान उनके अन्दर थे !! खुशी-खुशी उनके पहलू मे जा बैठे ! जिनके हाथो मे खूनी ख॑जर थे !!

No comments:

Post a Comment